Wednesday, September 15, 2010

Zillat bhari zindagi.

जो इतनी कढ़वाहट भर दी है ज़िंदगी ने
वो शायद अब मरने से ही जाएगी

इतना दर्द, इतनी रुसवाई जो मिली इस दुनिया से
वो दुनिया से जाने के बाद ही जाएगी

इतनी शिद्दत से जो की थी मोहब्बत
अब वो बदल गयी है ज़िल्लत में

उस नाखुदा के ठुकराने पे भी जो ना गयी
वो शायद खुदा से मिल जाने से सँवर् जाएगी..

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