Ek Parastish.
तेरी मोहब्बत का ग़म
सीने में लिए बैठे हैं
कैसे किसी को हम बतायें
क्या-क्या अरमान लिए बैठें हैं
तू हैं नहीं पास मेरे
तेरी तस्वीर लिए बैठें हैं
इक बार दीदार हो जाए तेरा
यह उम्मीद लिए बैठें हैं
वो दिन वापिस क्यूँ नहीं आते
जिनका तस्सव्वुर किए बैठें हैं
जो बेरूख़ी की तू दे रहा है सज़ा
वो सज़ा चुपचाप लिए बैठें हैं
मेरी परस्तिश तुझे क्यूँ मंज़ूर नहीं
ऐसे कितने सवाल लिए बैठें हैं
आज उस परस्तिश का हो इम्तिहान
यह तमन्ना हम किए बैठें हैं
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