Wednesday, September 15, 2010

Unki ghazal, hamara naam.

उनकी ग़ज़ल में

अब हमारा नाम नहीं

हमारा ज़िक्र

उनकी सुबह में

और शाम में नहीं

कैसे समझ लें

की अब भी उन्हें याद हैं हम

जब खुद ही उनहें अपना नाम याद नहीं

No comments:

Post a Comment