दिन का चढ़ना और रात का ना ख़तम होना ज़हर लगता है
आती जाती साँसों का सिलसिला ज़हर लगता है
नींद से पहले तेरी याद आना ज़हर लगता है और उस याद का दर्द ज़हर लगता है
सवेरे उसी दर्द का एहसास ज़हर लगता है
तेरी जूस्तजू, तेरा घम ज़हर लगता है.......
ज़िंदगी की पायदारी ज़हर लगती है
इस दर्द की शिद्दत भी ज़हर लगती है
तू पास नहीं है आज मेरे
तेरी नफ़रत, यह ज़ॉक-ए-ख्वारी ज़हर लगती है
आती जाती साँसों का सिलसिला ज़हर लगता है
नींद से पहले तेरी याद आना ज़हर लगता है और उस याद का दर्द ज़हर लगता है
सवेरे उसी दर्द का एहसास ज़हर लगता है
तेरी जूस्तजू, तेरा घम ज़हर लगता है.......
ज़िंदगी की पायदारी ज़हर लगती है
इस दर्द की शिद्दत भी ज़हर लगती है
तू पास नहीं है आज मेरे
तेरी नफ़रत, यह ज़ॉक-ए-ख्वारी ज़हर लगती है
No comments:
Post a Comment