Wednesday, September 15, 2010

Kal.

जो चला गया 
वो एक कल था
एक आशा की किरण
एक पल था
उमीदों से भरा हुआ
खुश सा एक क्षण था
जीने की राह दिखाता सा
ऐसा ही वो प्रण था


तो क्या हुआ 
अगर वो आज नहीं
मुझमें वो खुशी
वो एहसास नहीं
जीने की चाह
और दिल में प्यार नहीं
वो कल कभी तो मेरा था....




And my friend Raamesh's version goes----



जो चला आएगा
वो एक कल होगा 
एक आशा की किरण 
एक पल होगा
उमीदों से भरा हुआ 
खुश सा एक क्षण होगा 
जीने की राह दिखाता सा 
ऐसा ही वो प्रण होगा

तो क्या हुआ 
अगर वो आज नहीं 
मुझमें वो खुशी 
वो एहसास नहीं 
जीने की चाह 
और दिल में प्यार नहीं 
वो कल कभी तो मेरा होगा....

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