वो एक चहरा
तलाशती है आँखें
भीड़ में
वीराने में
अपने में
बेगाने में
हर-एक सूरत
उसकी सी लगती है
हर-एक नाम
सुना सा लगता है
चाह कर भी
उसे देख ना पाएँ
यह एहसास
मौत सा लगता है
आज भी ढूँढा उसे
आज भी पुकारा
हज़ारों-लाखों में बस वो एक
एक चहरा तुम्हारा....
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