Wednesday, September 15, 2010

Ek Chehraa..

वो एक चहरा

तलाशती है आँखें



भीड़ में

वीराने में

अपने में

बेगाने में




हर-एक सूरत

उसकी सी लगती है

हर-एक नाम

सुना सा लगता है




चाह कर भी

उसे देख ना पाएँ

यह एहसास

मौत सा लगता है




आज भी ढूँढा उसे

आज भी पुकारा

हज़ारों-लाखों में बस वो एक

एक चहरा तुम्हारा....

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