मेरा नाम.....
कल तुम्हारे होंठों पे आया था
सुनके पिघल सी गयी थी मैं
एक बार जो इक़रार कर लिया था प्यार का
गिरती-गिरती कुछ संभल सी भी गयी थी मैं
आज फिर
तमन्नाओं का जुनून जागा है
आज फिर
तुम्हारी बाहों में झूलना है
सब कुछ भुला के
अपना लो फिर से
आज भी तुम में
मुझे खुद को ढूँढना है....
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