Wednesday, September 15, 2010

Ek dua.

वीरान सी ज़िंदगी में
आज एक उम्मीद जागी है
कब से सोई थी जो क़िस्मत
करवट लेकर आज जागी है


खुशनुमा सी एक हवा चली है
मेरे सारे दर्द जैसे लेकर भागी है
वो पुरानी याद जो सीने को चीरती थी
मुझे आज़ाद करके वो अब भागी है


फिर इस दिल को चोट ना पहुँचे
यह दुआ हम ने खुदा से माँगी है
अब तक तो सिर्फ़ जुदाई माँगी थी तुमने
शुक्र है आज हमारी जान माँगी है..
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