मेरा नाम.....
कल तुम्हारे होंठों पे आया था
सुनके पिघल सी गयी थी मैं
एक बार जो इक़रार कर लिया था प्यार का
गिरती-गिरती कुछ संभल सी भी गयी थी मैं
आज फिर
तमन्नाओं का जुनून जागा है
आज फिर
तुम्हारी बाहों में झूलना है
सब कुछ भुला के
अपना लो फिर से
आज भी तुम में
मुझे खुद को ढूँढना है....
Tuesday, September 21, 2010
Zeher
दिन का चढ़ना और रात का ना ख़तम होना ज़हर लगता है
आती जाती साँसों का सिलसिला ज़हर लगता है
नींद से पहले तेरी याद आना ज़हर लगता है और उस याद का दर्द ज़हर लगता है
सवेरे उसी दर्द का एहसास ज़हर लगता है
तेरी जूस्तजू, तेरा घम ज़हर लगता है.......
ज़िंदगी की पायदारी ज़हर लगती है
इस दर्द की शिद्दत भी ज़हर लगती है
तू पास नहीं है आज मेरे
तेरी नफ़रत, यह ज़ॉक-ए-ख्वारी ज़हर लगती है
आती जाती साँसों का सिलसिला ज़हर लगता है
नींद से पहले तेरी याद आना ज़हर लगता है और उस याद का दर्द ज़हर लगता है
सवेरे उसी दर्द का एहसास ज़हर लगता है
तेरी जूस्तजू, तेरा घम ज़हर लगता है.......
ज़िंदगी की पायदारी ज़हर लगती है
इस दर्द की शिद्दत भी ज़हर लगती है
तू पास नहीं है आज मेरे
तेरी नफ़रत, यह ज़ॉक-ए-ख्वारी ज़हर लगती है
Tum zaruur aana.
मेरी कब्र पर ज़रूर आना तुम
बा-उम्र इन आँखों को सिर्फ़ तुम्हारा इंतज़ार था, तब नहीं आए
मेरी कब्र पर ज़रूर आना तुम
हर इक लम्हा तुम्हारी जूस्तजू की इस दिल ने, तब नहीं आए
मेरी कब्र पर ज़रूर आना तुम
मुझे अपना लो-ये यह ख्वाहिश पूरी करने नहीं आए
मेरी कब्र पर ज़रूर आना तुम
इस जिस्म का कुछ गिला हो ना हो
रूह की सलामती के लिए
मेरी कब्र पर ज़रूर आना तुम.
बा-उम्र इन आँखों को सिर्फ़ तुम्हारा इंतज़ार था, तब नहीं आए
मेरी कब्र पर ज़रूर आना तुम
हर इक लम्हा तुम्हारी जूस्तजू की इस दिल ने, तब नहीं आए
मेरी कब्र पर ज़रूर आना तुम
मुझे अपना लो-ये यह ख्वाहिश पूरी करने नहीं आए
मेरी कब्र पर ज़रूर आना तुम
इस जिस्म का कुछ गिला हो ना हो
रूह की सलामती के लिए
मेरी कब्र पर ज़रूर आना तुम.
Wednesday, September 15, 2010
Kal.
जो चला गया
वो एक कल था
एक आशा की किरण
एक पल था
उमीदों से भरा हुआ
खुश सा एक क्षण था
जीने की राह दिखाता सा
ऐसा ही वो प्रण था
तो क्या हुआ
अगर वो आज नहीं
मुझमें वो खुशी
वो एहसास नहीं
जीने की चाह
और दिल में प्यार नहीं
वो कल कभी तो मेरा था....
And my friend Raamesh's version goes----
जो चला आएगा
वो एक कल होगा
एक आशा की किरण
एक पल होगा
उमीदों से भरा हुआ
खुश सा एक क्षण होगा
जीने की राह दिखाता सा
ऐसा ही वो प्रण होगा
तो क्या हुआ
अगर वो आज नहीं
मुझमें वो खुशी
वो एहसास नहीं
जीने की चाह
और दिल में प्यार नहीं
वो कल कभी तो मेरा होगा....
वो एक कल था
एक आशा की किरण
एक पल था
उमीदों से भरा हुआ
खुश सा एक क्षण था
जीने की राह दिखाता सा
ऐसा ही वो प्रण था
तो क्या हुआ
अगर वो आज नहीं
मुझमें वो खुशी
वो एहसास नहीं
जीने की चाह
और दिल में प्यार नहीं
वो कल कभी तो मेरा था....
And my friend Raamesh's version goes----
जो चला आएगा
वो एक कल होगा
एक आशा की किरण
एक पल होगा
उमीदों से भरा हुआ
खुश सा एक क्षण होगा
जीने की राह दिखाता सा
ऐसा ही वो प्रण होगा
तो क्या हुआ
अगर वो आज नहीं
मुझमें वो खुशी
वो एहसास नहीं
जीने की चाह
और दिल में प्यार नहीं
वो कल कभी तो मेरा होगा....
Zara si..
zara si hansi
zara si khushi
itne saare gham
itna saara dard
zara si chahat
zara sa pyar
itni nafrat
itna ahemkaar
zara si masumiyat
zara sa vishwaas
itna bada dhokha
itne saare ilzaam
zara sa aitbaar
zara si dosti
itni berukhi
itna soonapan
zara si zameen
zara sa aasmaan
do muthi mitti
aur itna sa kafan..
zara si khushi
itne saare gham
itna saara dard
zara si chahat
zara sa pyar
itni nafrat
itna ahemkaar
zara si masumiyat
zara sa vishwaas
itna bada dhokha
itne saare ilzaam
zara sa aitbaar
zara si dosti
itni berukhi
itna soonapan
zara si zameen
zara sa aasmaan
do muthi mitti
aur itna sa kafan..
Zillat bhari zindagi.
जो इतनी कढ़वाहट भर दी है ज़िंदगी ने
वो शायद अब मरने से ही जाएगी
इतना दर्द, इतनी रुसवाई जो मिली इस दुनिया से
वो दुनिया से जाने के बाद ही जाएगी
इतनी शिद्दत से जो की थी मोहब्बत
अब वो बदल गयी है ज़िल्लत में
उस नाखुदा के ठुकराने पे भी जो ना गयी
वो शायद खुदा से मिल जाने से सँवर् जाएगी..
वो शायद अब मरने से ही जाएगी
इतना दर्द, इतनी रुसवाई जो मिली इस दुनिया से
वो दुनिया से जाने के बाद ही जाएगी
इतनी शिद्दत से जो की थी मोहब्बत
अब वो बदल गयी है ज़िल्लत में
उस नाखुदा के ठुकराने पे भी जो ना गयी
वो शायद खुदा से मिल जाने से सँवर् जाएगी..
परछाईं
अब वो एहसास भी जाता रहा
जिसके सहारे हम जीते थे
जिन उम्मीदों ने साँसें चलाईं थी अब तक
वो भी अब जाती रहीं
एक बस सिर्फ़ परछाईं का रिश्ता सा लगता है
जिस की तस्वीर में ना तुम हो, ना हम...
जिसके सहारे हम जीते थे
जिन उम्मीदों ने साँसें चलाईं थी अब तक
वो भी अब जाती रहीं
एक बस सिर्फ़ परछाईं का रिश्ता सा लगता है
जिस की तस्वीर में ना तुम हो, ना हम...
Unki ghazal, hamara naam.
उनकी ग़ज़ल में
अब हमारा नाम नहीं
हमारा ज़िक्र
उनकी सुबह में
और शाम में नहीं
कैसे समझ लें
की अब भी उन्हें याद हैं हम
जब खुद ही उनहें अपना नाम याद नहीं
अब हमारा नाम नहीं
हमारा ज़िक्र
उनकी सुबह में
और शाम में नहीं
कैसे समझ लें
की अब भी उन्हें याद हैं हम
जब खुद ही उनहें अपना नाम याद नहीं
Ek dua.
वीरान सी ज़िंदगी में
आज एक उम्मीद जागी है
कब से सोई थी जो क़िस्मत
करवट लेकर आज जागी है
खुशनुमा सी एक हवा चली है
मेरे सारे दर्द जैसे लेकर भागी है
वो पुरानी याद जो सीने को चीरती थी
मुझे आज़ाद करके वो अब भागी है
फिर इस दिल को चोट ना पहुँचे
यह दुआ हम ने खुदा से माँगी है
अब तक तो सिर्फ़ जुदाई माँगी थी तुमने
शुक्र है आज हमारी जान माँगी है...
आज एक उम्मीद जागी है
कब से सोई थी जो क़िस्मत
करवट लेकर आज जागी है
खुशनुमा सी एक हवा चली है
मेरे सारे दर्द जैसे लेकर भागी है
वो पुरानी याद जो सीने को चीरती थी
मुझे आज़ाद करके वो अब भागी है
फिर इस दिल को चोट ना पहुँचे
यह दुआ हम ने खुदा से माँगी है
अब तक तो सिर्फ़ जुदाई माँगी थी तुमने
शुक्र है आज हमारी जान माँगी है...
Chehraa.
Ek dhundhla sa chehraa
Dikhta raha
Shaam ki aagosh mein
Baahen phailaye jab
Kaali ghata aayi thi
Main dekhti rahi
Saraahati rahi
Koshish ki
Ki uth ke choom luun usse
Par, woh tum na the
Woh tum na the
Aur ab
Woh chehraa bhi nahin hai.
Dikhta raha
Shaam ki aagosh mein
Baahen phailaye jab
Kaali ghata aayi thi
Main dekhti rahi
Saraahati rahi
Koshish ki
Ki uth ke choom luun usse
Par, woh tum na the
Woh tum na the
Aur ab
Woh chehraa bhi nahin hai.
Ek Parastish.
तेरी मोहब्बत का ग़म
सीने में लिए बैठे हैं
कैसे किसी को हम बतायें
क्या-क्या अरमान लिए बैठें हैं
तू हैं नहीं पास मेरे
तेरी तस्वीर लिए बैठें हैं
इक बार दीदार हो जाए तेरा
यह उम्मीद लिए बैठें हैं
वो दिन वापिस क्यूँ नहीं आते
जिनका तस्सव्वुर किए बैठें हैं
जो बेरूख़ी की तू दे रहा है सज़ा
वो सज़ा चुपचाप लिए बैठें हैं
मेरी परस्तिश तुझे क्यूँ मंज़ूर नहीं
ऐसे कितने सवाल लिए बैठें हैं
आज उस परस्तिश का हो इम्तिहान
यह तमन्ना हम किए बैठें हैं
Ek Chehraa..
वो एक चहरा
तलाशती है आँखें
भीड़ में
वीराने में
अपने में
बेगाने में
हर-एक सूरत
उसकी सी लगती है
हर-एक नाम
सुना सा लगता है
चाह कर भी
उसे देख ना पाएँ
यह एहसास
मौत सा लगता है
आज भी ढूँढा उसे
आज भी पुकारा
हज़ारों-लाखों में बस वो एक
एक चहरा तुम्हारा....
तलाशती है आँखें
भीड़ में
वीराने में
अपने में
बेगाने में
हर-एक सूरत
उसकी सी लगती है
हर-एक नाम
सुना सा लगता है
चाह कर भी
उसे देख ना पाएँ
यह एहसास
मौत सा लगता है
आज भी ढूँढा उसे
आज भी पुकारा
हज़ारों-लाखों में बस वो एक
एक चहरा तुम्हारा....
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