Tuesday, May 10, 2011

Aaj.

आज बहुत पुरानी किताब के पन्नो से
तुम्हारा दिया हुआ वो फ़ूल मिला
कॉलेज के दिनो का दिया हुआ
वो फ़ूल आज भी
उस ज़िंदगी की याद दिलाता है
जब रोज़ सुबह जल्दी से तैयार होकर
मैं साइकल पर कॉलेज जाती थी
तुम अपने घर से पैदल आते थे
कभी तुम पहले पहुँचते थे
और कभी मैं
हम दोनो एक साथ ही
क्लास में जाते थे
जिस दिन तुम नहीं आते थे
मैं भी घर वापिस
चली जाती थी
वो दिन मुझे आज भी याद है
जब तुम दूर बॉमबे में
काम करने के लिए जा रहे थे
उस दिन
तुमने मुझे आख़िरी बार
एक फ़ूल दिया था
वो फ़ूल आज मुझे
बहुत पुरानी किताब के पन्नो में से मिला है

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