आज वो रुका-रुका सा कारवाँ फिर चल पड़ा है...
आज एक खुशनुमा सी हवा चली है
जब बारिश की चंद बूँदों ने
मेरे रोम-रोम को भिगो सा दिया है
आज ज़िंदगी फिर जी उठी है
जब तेरी आवाज़ ने आगे बढ़ कर
उन सोई चाहतों को जगा दिया है
आज आँखों में वो चमक फिर आ गयी है
जो आँसुओं की वज़ह से छिप गयी थी
जो शब्द पहले कोरे हो चले थे
आज फिर अपने आप तरो ताज़ा हो गये हैं
आज वो रुका-रुका सा कारवाँ फिर चल पड़ा है...
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