यह कौन है तुम्हारी आँखों में
कहीं वो मैं तो नहीं?
जिसका पीछा करती हैं तुम्हारी आँखें
कहीं वो मैं तो नहीं?
ना जागती- ना सोती
गुम सुम सी आँखें
जिनकी राह देखती हैं
कहीं वो मैं तो नहीं?
जिन आँखों में थी कभी हँसी
और अब आँसू भी नहीं आते
उन बंजर सी आँखों में
कहीं वो मैं तो नहीं?
एक लंबी रात की तरह
जिसका कोई अंत नहीं
उन काली, अंधेरी सी आँखों में
कहीं वो मैं तो नहीं?
एक वक़्त था
जब उन आँखों में सिर्फ़ मैं थी
आज भी कह दो ना
उन आँखों में अब मैं नहीं.....
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