Wednesday, July 6, 2011

एक सूना सा मकान

एक हारी हुई बाज़ी
एक थका सा इंसान
रोशनी से बहुत दूर
एक सूना सा मकान


एक पुराना सा मंदिर

एक भूली हुई बात
पैरों की आहट में
पायल की झंकार


एक चाँद का टुकड़ा

एक सूरज का ताप
बादलों की ठंडक में
पहली मौसम की बरसात


एक बुढ़िया की झोपड़ी

एक बिस्कुट की दुकान
सूखी पत्तियों से बनी
पेड़ पर वो मचान


एक आँगन में तुलसी

एक तुलसी पर दीया
चूल्‍हे के कोयले से
आँखों में धुआँ



एक नदी की हलचल

एक मुसाफिर की पदचाप
एक ऋतु का अंदेशा
एक चहरा गुमनाम


एक उदास सा चहरा

एक थका सा इंसान
रोशनी से बहुत दूर
वो सूना सा
मकान